Thursday, 4 September 2014

जीवन का उद्देश्य

ढूंढ रहा हूँ अपने जीवन का उद्देश्य
जिस किसी से भी मिलता हूँ 
वह एक नया मार्ग बतलाता है 
उसे यह नहीं पता ,मंजिल कैसे पाया जाता है ,

अब तक सभी ने ,दौलत का महत्व बताया ,
दौलत के बल पर,शोहरत का रहस्य बताया ,
जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है 
इस पर उनकी ख़ामोशी ,साफ बताता है 
नहीं पता इन्हे जीवन का क्या है उद्देश्य। 

अनगिनत लोगों से पुछ चुका हूँ 
जीवन का क्या हो उद्देश्य
कोई कहता ,परिवार ,कोई कहता प्रदेश 
कोई बतलाता राष्ट्र ,तो कोई बतलाता विदेश 

अकस्मात मेरे मन में ,यह ख्याल आया 
मैने कलम उठाया और लिख डाला 
यह सन्देश ,रोटी कपड़ा और माकन तो 
मिल जायेगा ,अपने कर्मो से 

शिक्षा -स्वास्थ-न्याय मिले सभी को 
यही हो तुम्हारे जीवन का उद्देश 
यही हो तुम्हारे जीवन का उद्देश 

                                                                                       ललित "सुमन "
                                            चीफ एडिटर "दैनिक इंडिया दर्पण "

Monday, 25 August 2014

करोल बाघ जोन भवन निर्माण विभाग में भ्रष्ट्राचार
जे. ई. बदल जाता लेकिन अवैध निर्माण नहीं रुकता  

Tuesday, 19 August 2014

"प्रभु आये थे ,दे गए संदेश "


सूर्य भी उगता है ,हमारे इशारे पे 
चन्दन भी उगता है हमारे इशारे पे 
अस्त होने से पहले ,पुछता  है
अस्त हो जाऊं "सुमन ".
    हम  तो कहते है यारो 
    हम भी चलते है किसी के इशारे पर 
    वह खुदा है ,वह ख़ुदा है ........ 

तुमने देखा है ईश्वर को 
क्या तुमने देखा है अल्ला को 
तुमने देखा है गुरुगोविंद को 
क्या तुमने देखा है ईसा को 
यह सिर्फ एक ,विश्वास व आस्था है 
फिर तुम्हे अपने  
नेक कर्मो पर विश्वास
क्योँ नहीं अपने 
कर्म फलो पर 
आस्था क्यो नहीं।
मंदिर -मस्जिद,चर्च 
 गुरुद्वारा  के नाम पर  
तू लड़ता है 
इसी  पर तू मरता है 
एक दूसरे से करता है तू नफरत
 लेकिन सभी प्रभु ने तो प्यार का सुनाया है पैगाम। 

क्यों नहीं ,तुम्हे अपने कर्मो पर विश्वास 
क्यों नहीं ,रखता 'कर्मफल ' पर आस्था 
कब -तक, नफरत फैलाते रहोगे 
देवो के अस्तित्व पर ,सवालिया निशान लगाकर  
हमने ईश्वर,अल्ला,वाहेगुरु व ईसा को देखो है
वे कह रहे थे तू मेरा यह पैगाम जन-जन तक पंहुचा दे ,

जो जाति -पात ,ऊच-नीच व क्षेत्रीयता फैलता है 
वो पुरुषोत्तम राम नहीं ,मानवता का दुश्मन रावण है। 

बड़े आहत थे अल्ला वाहे गुरु ईसा
कह रहे थे ,इन्हे मेरा पैगाम सुना दो 
हमने प्यार करना दीन दुखियों को 
मदद करना ,बीमारो की सेवा करने का 
सन्देश दिया था ,अत्याचार ,दोहन ,शोषण 
के खिलाफ संघर्ष किया था ,हमने कभी 
नफरत का पैगाम नहीं दिया ,फिर 
हमारे नमो का इस्तेमाल कर ये मुर्ख 
क्योँ मानवता की धज्जियाँ उड़ा रहे है ,

देना उन्हें यह पैगाम अगर पडोसी भूखा 
सो रहा है और तुम भले स्वादिष्ट व्यंजन समझ 
कर खा रहे हो तो वह भोजन तुम्हारे लिए विष है, 

देना उन्हें यह पैगाम अगर कोई लाचार
कराह रहा है और तुम हंस रहे हो तो समझो 
तुम मेरा उपहास उड़ा रहे हो ,अगर 
वास्तव में तुम्हे ईश्वर -अल्ला -वही गुरु व ईसा 
से प्रमे है ,उनपर विश्वास है ,धर्म में आस्था है 
तो यह प्रतिज्ञा करो 
           जाति धर्म ,वर्ग ,भेद के नाम पर हम 
नहीं लड़ेंगे  ," मानवता " की रक्षा खातिर मरना पड़ा 
तो हम मरेंगे ,सत्य -अहिंसा के पथ पर चलकर 
प्रभु तेरी चरणों में हम आयेंगे,प्रभु चरणो में अपना 
जीवन ,सादाजीवन -उच्च विचार के साथ बिताएंगे। 

             प्रभु आये और अपना सन्देश दे गये ,हमने 
तुम्हे बता दिया ,बाकीं अब तुम्हारी इच्छा।

                                                                  ललित "सुमन"

Monday, 18 August 2014

"परायों"  को  भी "अपना" कर 

गिला -शिकवा , छोड़  दो  यारों
सबको , एक   दिन  जाना है।
अपना  पराया , कौन  है जग  मै
सबको  एक दिन  जाना है।
मुट्ठी  बंद  करके  तुम   आये  थे
खाली हाथ ही जाना है
अपना  पराया  कौन  है  जग  मई
सबको  एक  दिन  जान है।
इतराने दो उनको यारों
जो दौलत  पा   कर  इतराते  है
इतराने दो उनको  यारों
जो  शक्ति  पाकर  ,रौब दिखाते है
इतराने  दो  उनको   यारों
जो  अपना वैभव दिखाते है
अपना पराया कौन है जग  में
सबको एक दिन जाना है।

बता सको तो नाम बताओ
कौन -कौन दौलतमंद यहाँ जनम लिया
बता सको तो नाम बताओ
कौन शक्तिमान अब याद रहा
बता सको तो नाम बताओ
किसकी वैभव जिन्दा  है
इतिहास उसी को याद रखता
जिसके आँगन अच्छाइयां पलटी है
जो देता क़ुरबानी ,वाही अमित छाप छोड़ता है
बुराइयों से लड़कर ,अच्छाइयों का पुष्प
खिलताhai ,खुशबू उसकी सदा सदा
करो और फैलती है
अपन पराया कौन है  जग में
सबको एक दिन जाना है।

इतिहास भरा है शूरवीरो से
कायरो को कब ,कौन पूजता है
जन्मmila है "मानव" का तो
"मानवता" की तू रक्षा कर

अपना पराया का भेद मिटा कर
परायों को भी अपना कर
गिला शिकवा छोड़ दो यारो
सबको एक दिन जाना है

अपना पराया कौन है जग में
सबको एक  दिन जाना है...
                                                 ललित "सुमन"



"कर्मपथ - कर्मपथ"

जीवन को समर्पित
एक ही मंत्र ,कर्म पथ -कर्म - पथ

बचपन से लेकर अब तक
विभिन्न  राहो  पर, चलते हुए
मंजिल  तक, पहुचने  को आतुर
मेरा yah मन ,कहता  है -पथिक
तू निरंतर बढ़ता चल ,यही है तेरा कर्मपथ
अच्छाइयों  के फूल ,खिलाना  है तुम्हे
बुराइयों  के  काटो  से  ,करना  होगा  संघर्ष
रुकना  नहीं  पथिक ,थकना  नहीं  पथिक
बुराइयों  के  कांटे  ,तुम्हे  पथ  पथ  पर  रोकेंगे
अच्छाइयों  के  बल  पर  चलता  रह
अपने  कर्म  पथ  अपने  कर्म  पथ
श्री  कृष्ण  हो  या  श्री  राम
ईसा  हो  ,गुरु गोविन्द  या  मो. हजरत
सभी  को  करना  पड़ा  है संघर्ष  ,बुराइयों  से
तब  ही  खिला  है ,अच्छाइयों  का  फूल
चारों  दिशाओं में फैली  है उसकी  सुगंध
पथिक  चलता  रह  ,कर्म  पथ  -कर्म  पथ

सब जानते   है ,जो  आया  है वह  जायेगा
भरम  में  उलझ  कर  ,भूल  जाते  है कर्म  पथ
अच्छाइयों  को  त्याग  ,
बुराइयों   को  आणिक   स्वार्थवश  कर  लेते  है आत्मसाध  ,
जीवन  समाप्त   हो  जाता
उन्हें  नहीं  मिल  पता  ,सुगंध
पथिक  ,तू - मत  भटक
चिरकाल  तक  ,याद  करेगी  धरा
तुम्हारे  संघर्ष  को  ,तू  सदा  बढ़ताचल  
कर्म  पथ - कर्म  पथ - कर्म पथ !                  

                                           ललित "सुमन"

Monday, 17 February 2014

सम्पादकीय:- उपराज्यपाल पर अब सारी जिम्मेदारी

दिल्ली विधानसभा  चुनाव परिणाम आने के साथ ही यह स्पष्ट हो चुका था कि दिल्ली की आवाम ने दिल्ली को बीच मझधार  में लाकर खड़ा कर दिया है और कांग्रेस-भाजपा को दरकिनार कर एक नइ पार्टी आप पर भी हद से अधिक भरोसा नहीं किया। भाजपा को 32, आप को 28 और कांग्रेस को सत्ता से दूर करते हुए 8 सीट पर समेट कर अपने आक्रोश की ज्वाला को भले शांत किया लेकिन सभी पार्टियों को अग्नि  परीक्षा देने के लिए विवश कर दिया।  दिल्ली के उपराज्यपाल डा. नजीब जंग ने बड़ी पार्टी के नाते भाजपा को आमंत्रित किया लेकिन भाजपा बहुमत नहीं होने की बात कह सत्ता बनाने से इंकार कर दिया। दूसरी बड़ी पार्टी आप को कांग्रेस ने समर्थन दिया लेकिन आप ने समर्थन पत्र  प्राप्त होने के बावजूद जनता से रायसुमारी की और सरकार बन गइ। उपराज्यपाल ने पद एवं गोपनीयता की शपथ आप मंत्री मंडल को दिलाकर अपने कर्त्तव्य  का पालन किया।
 49 दिनों के अंदर कइ घटनाक्रम घटित हुइ और तरह-तरह के मसले आमलोगों के सामने आये जो आज तक दिल्ली की जनता ने दूसरे प्रदेशों के संदर्भ में मीडिया के माध्यम  से देखा व सूना था लेकिन पहली बार वे अपने राज्य में अपने आंखों से देखा कि सत्ता और सत्ता संचालन के दरम्यान दिल्ली की सरकार के सामने किस-किस प्रकार की समस्याएं आती है और एक मुख्यमंत्री  को किस प्रकार संघर्ष करके दिल्ली की जनता के हीत में विकास कार्य का निष्पादन करना पड़ता है। दिल्ली में पांच वर्ष भाजपा ने शासन किया लेकिन उसे तीन मुख्यमंत्री  बनाने पड़े। मदन लाल खुराना के त्याग व तपस्या को दरकिनार करना भाजपा को इतना भारी पड़ा कि आज तक वह सत्ता वापसी के लिए खून-पसीना बहा रही है लेकिन दिल्ली की जनता का दिल नहीं जीत पा रही है। मदन लाल खुराना ने हवाला कांड डायरी में नाम आने पर आडवाणी के साथ पद त्याग कर अपने नैतिकता व उच्च चरित्रा का परिचय दिया, लेकिन भाजपा ने अपने उस कर्मयोगी को दरकिनार कर दिल्ली की जनता का विश्वास खो दिया।
 कांग्रेस को दिल्ली की जनता ने मौका दिया। शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार तीन बार बनी दिल्ली ने विकास किया, जो साफ नजर आ रहा है, लेकिन इस बार दिल्ली की जनता ने न सिर्फ  कांग्रेस को आठ सीट पर समेट दिया बल्कि  मुख्यमंत्री  शीला दीक्षित को पढ़े-लिखे वर्ग  ने नकार दिया और उन्हें पराजय का मुंह देखना पड़ा, कारण स्पष्ट था। दस वर्ष शीला दीक्षित सरकार ने जमकर काम किया लेकिन तीसरी बार चुनाव जीतने के उपरांत कांग्रेस ने युवा वर्ग  के लिए, आमलोगों के लिए वह कार्य नहीं किया जिसकी उम्मीद दिल्लीवासी कर रहे थे। मंहगाइ-भ्रष्टाचार के साथ कांग्रेस की आपसी गुटबाजी से दिल्ली का आम जनता त्रस्त रही, उसका सूनने वाला कोइ नहीं था, भाजपा-कांग्रेस के नेता अपने-अपने क्षेत्र  में सांठ-गांठ कर लिया, निगम में भाजपा लुटती रही, प्रांत में कांग्रेस, बेचारी जनता पिसती रही, तत्कालीन उपराज्यपाल, तेजेन्द्र खन्ना भी कांग्रेस व भाजपा के कुछ विधायक  को अपने पक्ष में कर आम जनता की हित से अधिक शीला सरकार को कमजोर व भाजपा-कांग्रेस नेताओं को संरक्षण देते रहे। दिल्ली की जनता आखिर कहां अपनी फरियाद लेकर जाये। वह पिसती रही, खामोश रही, अन्दर-अन्दर सुलगती रही और जब अन्ना हजारे का आन्दोलन हुआ सड़कों पर उतर आयी। अरविन्द केजरीवाल ने विश्वनाथ प्रताप सिंह की तरह जनता के आक्रोश को समझा और राजनीतिक आखाड़े में कुद गये।
 सच्चाइ यही है इसे जिसको जिस रूप में मुल्यांकन करना है, विवेचना करना है करता रहे। भाजपा ने मदन लाल खुराना को दरकिनार कर गुटबाजी के माध्यम  से सत्ता तो प्राप्त कर, सत्ता सुख भोग लिया लेकिन कभी सशक्त विपक्ष की भूमिका अदा नहीं किया अगर वह सशक्त विपक्ष की भूमिका अदा किया होता तो 2009 के चुनाव में वह सत्ता में वापस आ सकती थी। भाजपा पुन: बार-बार वही गलती दुहरा रही है, कभी विजेन्द्र गुप्ता को आगे करती है, कभी विजय गोयल को आगे करती है, कभी हर्ष वर्धन  को आगे करती है। खुराना के बाद अगर भाजपा में प्राण अगर किसी ने फूंका  तो वह विजेन्द्र गुप्ता है, जुनियर-सीनियर की लड़ाइ में भाजपा जनता के दिलों में विश्वास स्थापित करने में नाकामयाब रही। क्या कारण है दो वर्ष पुरानी एक युवाओं की टीम इतनी-पुरानी कांग्रेस व भाजपा को चुनौती देने में न सिर्फ कामयाब रही बलिक 28 सीट प्राप्त कर दिल्ली में 49 दिन सरकार चला कर पुन: कांग्रेस-भाजपा को कठघड़े में खड़ा कर एक नइ पारी की शुरूआत करने पूरे देश में निकल पड़ी है। दिल्ली की जनता या देश की जनता सब कुछ देख रही है, वह सब कुछ समझती है, जो पुराने लोग हैं वे ये जानते होंगे कि जब देश आजाद हुआ था तो कइ नेता चुनाव के पक्ष धर नहीं थे लेकिन नेहरूजी ने उस वक्त चुनाव कराया, जनता पर भरोसा किया और देश की जनता भले, भूखे पेट रहे, वस्त्र न हो, इलाज के पैसे न हो लेकिन अपने राष्ट्र के स्वाभिमान के लिए अपना बलिदान देने में कभी पीछे नहीं रहा है, इतिहास इस बात का गवाह है आज भारत एक विशाल लोकतांत्रिक राष्ट्र है तो इसका प्रमाण यही है।
 अरविन्द केजरीवाल एवं उनका मंत्रिमंडल  नये लोगों का संगठन है, पहली बार सभी चुनकर आये थे, क्या हमारे पुराने विधयकों, मंत्रियों का यह दायित्व नहीं बनता था कि वे उन्हें यह बताते की एक राज्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए बजट की आवश्यकता होती है, विकास की गति बनाये रखने के लिए इस प्रकार की योजना बनानी पड़ती है, लेकिन सरकार बनने के साथ ही राजनीति शुरू हो गइ, सरकार को घेरो, बदनाम करो, उलझाओ। अगर पुराने नेता राजनीति इसे कहते है तो आम आदमी पार्टी ने भी वही किया जो वे करते है तो फिर इसमें गलत क्या है। अन्य नेता मीडिया व समाचार पत्रों  में सुर्खियां  बनाने के लिए मीडिया का उपयोग करे तो सही, आम पार्टी बोले तो गलत, आप संविधन की उपेक्षा करो तो सही, आम पार्टी करे तो गलत आखिर ऐसा क्यों। गलत तो गलत है चाहे वह कोइ करे। अरविन्द केजरीवाल ने विधानसभा  के अंदर कांग्रेस भाजपा पर सीधा  आरोप लगाया कि अम्बानी से भाजपा कांग्रेस दोनों चंदा लेती है उसके खिलाफ एफआर्इआर का उन्होंने आदेश दिया, इसलिए दोनों दल मिलकर जनलोकपाल बिल सदन में नहीं आने दे रहे। यह पूरी तरह राजनीतिक विचार कहा जा सकता है लेकिन यही आरोप तो दिल्ली में भाजपा, कांग्रेस सरकार पर व केन्द्र में भाजपा, कांग्रेस की सरकार पर इसी तरह की अनेकों आरोप बेगैर सिर-पैर की लगाती रही है। विश्वनाथ प्रताप सिंह ने जिस बोफोर्स घोटाला के नाम पर कांग्रेस को सत्ता से हटाया था वही बोपफोर्स तोप कारगिल युद्ध में भारतीय सेना का मस्तक ऊंचा किया था।
 सिख दंगा का मामला बीस वर्षों  से दिल्ली में 36 रहा था, भाजपा ने भी शासन किया, अकाली उनके मित्र  है लेकिन उन्होंने एसआर्इटी क्यों नहीं बनवाया। क्या भाजपा इसका जवाब दिल्ली की जनता को देगी। केजरीवाल ने राजनीति ही किया हो लेकिन सिख विरादगी के घाव पर मरहम तो लगाया, आपने ऐसा करना अपना कर्त्तव्य  क्यों नहीं समझा। पहले भी उपराज्यपाल थे, डा. नजीब जंग ही एसआर्इटी के लिए क्यों?  दिल्ली के उपराज्यपाल डा. नजीब जंग के पास एक बेहतरीन मौका है। इश्वर जब किसी से अति प्रसन्न होता है तो उसके सामने चुनौती पेश करता है ताकि वह अपनी दक्षता व क्षमता का प्रयोग कर इतिहास में अपने नाम दर्ज करा ले। डा. नजीब जंग को खुदा ने यह अवसर दिया है, वे राष्ट्रपति के दिल्ली में उत्तराधिकारी है, भूमि, पुलिस व कानून व्यवस्था सभी कुछ उनके पास है। विगत 20 वर्षों  में दिल्ली में जिनते भ्रष्टाचार हुए है उसकी निष्पक्ष जांच कराकर दिल्ली की जनता के दिल व दिमाग में यह बैठा दें कि कानून अभी जिंदा है। दिल्ली में जितने भूमि घोटाले हुए है, डीडीए प्लाट, आदि पर भू-माफियाओं  ने कब्जा कर रखा है उसे मुक्त कराकर इतिहास रच दें, दिल्ली की सड़कों पर और अपने घरों में लोग यह महसूस करें कि कोइ उनकी सुरक्षा के लिए सजग है तो क्या दिल्ली में राम-राज्य नहीं आ जायेगा।  उपराज्यपाल डा. नजीब जंग प्रशासनिक अधिकारी, रंगमंच के कलाकार, शिक्षाविद होने के साथ-साथ दिल्ली के उपराज्यपाल है और इश्वर ने उन्हें राजनीतिक दक्षता का परिचय देने का अवसर दिया है यह किसी कुदरती करिश्मा से कम नहीं है। वर्ष-2014-15 का बजट, बिजली कम्पनियों को पैसा, जल बोर्ड के विकास  प्रोजेक्ट, दिल्ली विश्वविधालय में गर्वनिगबडी विधायक  फंड, आदि मुददें रोजमर्रा का मुददा है लेकिन सबसे बड़ी बात है दिल्ली वासियों के दिल में कानून के प्रति विश्वास व संविधन के प्रति आस्था का विश्वास कायम करना। यह बेहतरीन मौका डा. नजीब जंग को समस्याओं के निदान के साथ इतिहास रचने के लिए कुदरत का तोहफा है।
ललित "सुमन" 

Thursday, 16 January 2014

दिल्ली सिर्फ केजरीवाल का?

केजरीवाल सरकार अगर वास्तव में आम आदमी की भला चाहती है तो उन्हें संगठित अपराध्, संगठित भ्रष्टाचार पर प्रहार करना होगा तभी दिल्ली का सामुहिक विकास सम्भव है, आम लोंगो के बीच उनकी सरकार की छवि लोकनायक के रूप में स्थापित होगा, अन्यथा देश की जनता पुन: नये देवदुत का इंतजार करेगी। यह देश व दिल्ली प्रदेश सिर्फ केजरीवाल का नहीं है, इसे सभी को मिलकर बेहतर बनाना होगा, यह किसी दबाव में नहीं, अंर्तआत्मा की आवाज पर होनी चाहिए कि आने वाली पीढ़ी को हम क्या देकर जाने वाले हैं।  

भारत की राजधानी  दिल्ली व केन्द्रशासित प्रदेश दिल्ली सिर्फ केजरीवाल का है, ऐसा ही लगता है। 15 वर्षों से लगातार प्रदेश पर शासन करने वाली कांग्रेस व पूर्व के वर्षो में पांच वर्ष शासन कर चुकी भाजपा, लगातार एक माह भी नहीं गुजारी, आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल की सरकार से पुछ रही है कि दिल्ली में पानी की समस्या का क्या हुआ, बिजली व्यवस्था का क्या हुआ, भ्रष्टाचार निदान का क्या हुआ, ला एण्ड आर्डर का क्या हुआ, काश्मीर मुददे पर क्या सोच है, नक्सल मुदे पर क्या राय है, देश की आर्थिक नीति पर आम आदमी पार्टी की क्या नजरिया है, बड़े मकान, छोटे मकान, सुरक्षा लेंगे-नहीं लेंगे आदि-आदि अनेको सवाल किया जा रहा है।
  आप अगर एक मकान से, दुसरे मकान में शिफ्ट  होते हैं तो उसे व्यवस्थित  करने में छ: महिना लग जाता, फिर  भी कई  समान नहीं मिलते। आम आदमी पार्टी में सिर्फ विन्नी एक मात्र   नेता है जो निगम पार्षद रह चुके हैं और सारा देश यह देख रहा है कि ''विन्नी'' जिददी बच्चे की तरह किस प्रकार अड़े है कि हमें भी खेलने दो, नहीं तो मैदान खोद डालूंगा। भारत की जनता इस बात का अंदाजा सरलता से लगा सकती है कि आम आदमी पार्टी का मैदान खोदकर भ्रष्टाचारनिदान, विकास के कार्य को अवरुद्ध  रखा जाय तो इससे किसका भला होने वाला है।
    दिल्ली प्रांत या यह देश अकेला अरविन्द केजरीवाल का नही है, एक अरब से अधिक की आबादी वाले इस मुल्क में से अरविन्द केजरीवाल भी एक नागरिक हैं, लेकिन अरविन्द केजरीवाल की नियत है कि यह देश भ्रष्टाचार मुक्त हो, और नीति यह है देश पुन: सोने की चिडि़या बने, दुध् की नदियां बहे।
कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा, राजद, जदयू, सी.पी.आर्इ.एम, अन्ना द्रमुक, एनसीपी, त्रिनमूल आदि अनेकों पार्टी की तरह ''आम आदमी पार्टी''  भी एक है। देश के कोने-कोने में बनी क्षेत्रीय पार्टी या अपने को राष्ट्रीय पार्टी कहने वाले क्या इस देश की जनता को यह बताएंगे कि किस पार्टी ने एक माह के अन्दर ''आम आदमी पार्टी'' की तरह अपने घोषणा पत्रों  के मुख्य मुद्वों को इस प्रकार अमली जामा पहनाने का प्रयास किया है।
       जो काम करता है गलती भी, भूल भी उसी से होती है, गलती की सजा व भूल  का सुधार  कर आगे बेहतरीन कार्य किये जा सकतें हैं लेकिन जो काम ही न करे, उसे क्या कहा जाएगा। वह देश का, समाज का, आम व्यकित का शुभचिंतक है या दुश्मन।
      कांग्रेस पार्टी इस देश पर सबसे अधिक शासन किया है। कांग्रेस पार्टी ने इस देश में अनेकों विकास कार्य किये है, भारत आज अगर विकासशील देश से आगे विकसित राष्ट्र की ओर कदम बढ़ा रहा है तो इसका अर्थ है, कांग्रेस ने राष्ट्रहीत, समाजहीत व आम जन के हीत में कार्य किया है, यह सत्य है कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भ्रष्टाचार को बढ़ाया, जमकर राष्ट्र को लूटा, अपनी सेहत बनाया, इन्हें दंडित किया जाना चाहिए। लेकिन यह भी सत्य है कि सूचना का अधिकार, खाध सुरक्षा अधिकार, भूमि अधिग्रहण विधेयक  जैसे मुद्वों के अतिरिक्त भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए लोकपाल विधेयक  पास कराने में समप्रग सरकार कामयाब हुई  है। हो सकता है, कुछ मुद्वों में और सुधार की आवश्यकता हो, इसे दुर किया जाना चाहिए, यह समप्रग सरकार की आम जनता के प्रति जिम्मेदारी है।
    समप्रग सरकार बनने से पूर्व विपक्ष भी सत्ता सुख भोगा है, अटल बिहारी वाजपेयी, एच.डी. देवगौड़ा, इन्द्र कुमार गुजराल, वी.पी. सिंह, चन्द्रशेखर आदि भी केन्द्र की सरकार में प्रधानमंत्री  रह चुके हैं, क्या उस वक्त भारत भ्रष्टाचार मुक्त था, देश में किसान ने आत्महत्या नहीं किया, नारी उत्पीड़न के मामले नहीं थे, बेरोजगारी नहीं था, सभी ने अपने स्तर से राष्ट्र निर्माण का प्रयास किया, उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए समप्रग सरकार भी लगातार राष्ट्र उत्थान में लगी है। देश के आवाम को लगेगा कि समप्रग सरकार अपने दायित्व निर्वाह में नाकामयाब रही है तो जनता उसे सत्ता से विमुख कर देगी लेकिन नरेन्द्र मोदी भाजपा के पी.एम. इन वेटिंग करोड़-करोड़ रूपये सभाओं पर खर्च कर सिर्फ अपनी छवि सुधरने व भारत सरकार की छवि देश व विदेश में खराब कर रहे हैं, यह राष्ट्रहीत में नहीं है।
     नरेन्द्र मोदी को देश को यह बताना चाहिए कि मंहगाइ दर इस नीति से कम किया जा सकता है, भ्रष्टाचार को ऐसे नियंत्रित किया जा सकता है, बेरोजगारी कम करने के लिए इस प्रकार रोजगार के साधन उत्पन्न किये जा सकते हैं, देश को विकसित करने के लिए यह कदम कारगर हो सकते हैं, कृषक की भलाइ के लिये उनका विजेन यह है, न्याय व्यवस्था इस प्रकार सुदृढ़ हो सकती है, भारत की संस्कृति व सभ्यता को इस प्रकार अक्षुण्य रखा जा सकता है, लेकिन मोदी को तो सिर्फ गुजरात, व अपनी छवि बेहतर नजर आ रही।
    सवाल यह उठता है कि हाइटेक मंच बनाने पर जो राष्ट्र का धन खर्च हो रहा, क्या वह कालाधन  है, भाजपा का राजनीतिक फंड है, या देश को अस्थिर  करने वालों तत्वों से एकत्रा किया जा रहा है, वह कौन लोग हैं और केन्द्र में सरकार बनने पर वह इसकी क्या कीमत वसूल करेगा, मोदी उसके साथ क्या समझौता कर रखें हैं।
    देश का प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी बनें, राहुल गांधी  बनें, केजरीवाल बनें, प्रियंका गांधी  बनें, ममता बनर्जी बनें, मनोहर पारिक बने हमें क्या, अंतर पड़ता है। 18 घंटे काम, मुझे आज भी करना पड़ता है उस वक्त भी करना पड़ेगा। यह सत्य है कि भारत अगर भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र बनेगा, मंहगाइ पर नियंत्रण  हो जायेगा तो समाज के अंतिम पंक्ति  में खड़े व्यकित भी राहत की सांस लेंगा।
     बात शुरू हुर्इ थी केजरीवाल से और पहुंच गइ राष्ट्र पर । केजरीवाल को काम करने का मौका मिलनी चाहिए और केजरीवाल को भी एक निर्भीक, निष्पक्ष राजनेता की तरह एक-एक कर समस्याओं के निदान की दिशा में कदम-दर-कदम बढ़ाना चाहिए। केजरीवाल को सर्वप्रथम दिल्ली को भ्रष्टाचार मुक्त करने की दिशा में, योजनावद्व तरीके से प्रयास करना चाहिए था, लेकिन दिशा भटकता नजर आ रहा है।
   व्यकितगत अपराध् व संगठित अपराध् व भ्रष्टाचार में अंतर है। केजरीवाल सरकार को इसे समझना होगा। अपराध्-अपराध् है, भ्रष्टाचार-भ्रष्टाचार है लेकिन दोनों में अंतर है। व्यक्तिगत  अपराध् और व्यक्तिगत भ्रष्टाचार से एक व्यक्ति  या परिवार प्रभावित होता है लेकिन संगठित भ्रष्टाचार व संगठित अपराध् से समाज व राष्ट्र प्रभावित होता है। अगर विषैले पेड़ को जड़ समेत उखाड़ दिया जाय तो व्यक्ति, समाज व राष्ट्र का स्वत: भला हो जाएगा।
     केजरीवाल सरकार अगर वास्तव में आम आदमी की भला चाहती है तो उन्हें संगठित अपराध्, संगठित भ्रष्टाचार पर प्रहार करना होगा तभी दिल्ली का सामुहिक विकास सम्भव है, आम लोंगो के बीच उनकी सरकार की छवि लोकनायक के रूप में स्थापित होगा, अन्यथा देश की जनता पुन: नये देवदुत का इंतजार करेगी। यह देश व दिल्ली प्रदेश सिर्फ केजरीवाल का नहीं है, इसे सभी को मिलकर बेहतर बनाना होगा, यह किसी दबाव में नहीं, अंर्तआत्मा की आवाज पर होनी चाहिए कि आने वाली पीढ़ी को हम क्या देकर जाने वाले हैं।















ललित ''सुमन'', प्रधान संपादक 
अध्यक्ष, दिल्ली प्रदेश 
आल इंडिया स्मॉल एण्ड  मीडियम न्यूज़ पेपर्स 
फेडरेसन ( रजि.)