
रांची. आम तौर पर लोग पेट्रोल पंप पर तेल लेते समय मशीन में तेल की मात्रा या राशि फीड कराते हैं। इसके बाद यह तसल्ली हो जाती है कि पूरा तेल मिला। आप भी ऐसा सोचते हैं, तो आपको सावधान होने की जरूरत है। शहर के कई पेट्रोल पंपों में मशीन के साथ छेड़छाड़ करके आपको कम तेल दिया जा रहा है। डीबी स्टार की टीम ने इसकी पड़ताल की। शहर के कुछ पेट्रोल पंपों से टीम ने तेल लेकर मापा, तो पता चला कि प्रति लीटर 15 से 30 मिलीमीटर कम तेल दिया जा रहा है। हालांकि, तेल मापने के क्रम में तेल का कुछ अंश उड़ा भी होगा। इसके बावजूद इसकी माप इतना कम होना, सबकुछ साफ बयां करता है।
राजधानी के पेट्रोल पंपों में उपभोक्ताओं के साथ होने वाली लूट खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। लोगों को खुलेआम कम पेट्रोल- डीजल दिया जा रहा है। अधिकतर पेट्रोल पंपों में डिजिटल मशीन लगाया गया है। लेकिन, अधिकतर पेट्रोल पंपों में मीटर लॉक करने के बावजूद ग्राहकों को चूना लगाया जा रहा है। मान लीजिए आप किसी पंप पर पेट्रोल लेने गए और दो लीटर पेट्रोल देने को कहा। कर्मचारी फौरन दो का बटन दबाता है। आप पूरी राशि अदा कर रहे हैं, इसके बावजूद आपको तेल पूरा नहीं मिल रहा है। इसकी जांच करेंगे, तो पता चलेगा कि प्रति लीटर 20 से 60 मिलीलीटर तेल का आपको चपत लग रहा है।
ऐसा लगता है चपत
ग्राहकों को मीटर लॉक कराने के बावजूद चपत कई प्रकार से लगाया जा रहा है। मशीन में एक लीटर का आंकड़ा आते ही तेल देने वाला कर्मचारी नोजल निकाल लेता है। ऐसे में कुछ पेट्रोल पाइप में ही रह जाता है। इससे भी बड़ी आसानी से उपभोक्ता को चपत लग रही है, लेकिन पता नहीं चल पाता। पेट्रोल पंप संचालक भी इस बात को मानते हैं कि पाइप में तेल रहता है, मगर इसकी मात्रा ना के बराबर होती है।
बिना तेल दिए लाखों की कमाई
परिवहन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार रांची जिले में करीब साढ़े चार लाख गाडिय़ां है। रांची जिले में प्रतिदिन लगभग 1.10 लाख लीटर पेट्रोल की औसत बिक्री होती है। वहीं, रांची में प्रतिदिन औसतन .4 लाख लीटर डीजल की बिक्री भी होती है। रांची जिले में प्रतिदिन 2 लाख वाहनों (डीजल/पेट्रोल) में ईंधन डाले जाते हैं, जिसमें से अनुमान के मुताबिक लगभग डेढ़ लाख वाहनों में तेल डालने के समय मीटर लॉक नहीं किया जाता या फिर डिजिटल मशीनों में छेड़छाड़ करने के कारण ग्राहक से 08 से 54 पैसे तक बचा लिए जाते हैं। औसतन प्रति वाहन 45 पैसे के हिसाब से देखा जाए तो 1.5 लाख वाहनों में प्रतिदिन लगभग 67.5 हजार के ईंधन तो नहीं डाले जाते, लेकिन उसके पैसे ले लिए जाते हैं। इस मद में हर माह 20.25 लाख रुपए ग्राहकों से हड़प लिए जाते हैं।
सुविधाएं भी नदारद
अफसरों की लापरवाही से राजधानी के पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को वाजिब सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। ईंधन जांच व मुफ्त मुफ्त हवा की बात तो दूर, पीने का पानी व शौचालय की सुविधा भी नहीं है। सब तो सब, कई पेट्रोल पंपों पर तो सर्विस स्टेशनों के नाम भी नहीं लिखे गए हैं। नियमानुसार पंपों पर सर्विस स्टेशनों के नाम तो लिखे ही जाने चाहिए, वहां पानी और टॉयलेट के अलावा हवा चेक की सुविधा भी होनी चाहिए। लेकिन दूर दराज की कौन कहे, राजधानी के पेट्रोल पंपों पर भी यह सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, कुछ पेट्रोल पंपों पर हवा की मशीन लगाई तो गई है, लेकिन यह महज दिखावा है।
मैन्युअल तरीके से भी मिलता है पेट्रोल
पेट्रोल पंप डिजिटल पंप लग जाने के बाद भी अमाउंट लॉक न करके गड़बड़ी की जाती है। नियमानुसार पेट्रोल या डीजल लेने से पूर्व निर्धारित अमाउंट को डिजिटल मीटर में लॉक किया जाना चाहिए, उसके बाद उतनी राशि का पेट्रोल या डीजल पंप से निकलने के बाद वह बंद हो जाता है। जबकि, अधिकांश पेट्रोल पंपों में मीटर लॉक करने के बजाए आज भी यह काम मैन्युअल तरीके से ही किया जा रहा है। शहर में प्रतिदिन औसतन 1.10 लाख लीटर पेट्रोल और 83 हजार लीटर की बिक्री होती है। ऐसे में ग्राहकों को एक बार तेल लेने में 08 से 54 पैसे तक की चपत लगती है। हालांकि, यह राशि मामूली नजर आती है। लेकिन, औसतन 45 पैसे प्रतिलीटर की मानें तो प्रत्येक महीने आम लोगों को 20.25 लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
माप तौल विभाग गैर जिम्मेवार
किसी भी दुकान और पेट्रोल पंपों में उपभोक्ताओं को सही मात्रा में सामान मिले, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेवारी माप-तौल विभाग की है। पेट्रोल पंपों में सही मात्रा में तेल दिया जा रहा है कि नहीं उसे देखना भी माप-तौल विभाग का काम है। राजधानी के पेट्रोल पंपों में पूरे पैसे देने के बावजूद कम तेल मिल रहा है, क्या इसकी जांच होती है। यह जानने के लिए टीम ने जिला माप-तौल पदाधिकारी केसी चौधरी से उनके मोबाइल नंबर 9431167377 पर बात की। इस संबंध में पूछने पर उन्होंने कहा कि आपको क्या लगता है जांच नहीं होती। इसके बाद फोन काट दिया। दोबारा नंबर डॉयल किया गया, लेकिन फिर बात नहीं हो पाई।
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