Thursday, 9 January 2014

चाय बेचने वाला....


चाय बेचने वाला.... 

चाय बेचने वाला ही क्यो? कोई भी भारतीय नागरिक, भारत का प्रधानमंत्री  बनने का अधिकार  रखता है। नरेन्द्र मोदी तो आम आदमी से खास व्यक्ति हो चुके हैं, उन्होनें अपनी दावेदारी प्रधानमंत्री पद के लिए भाजपा से पेश करवाया है, तो इसमें हर्ज क्या है। प्रत्येक वह व्यक्ति सपना पालता है जिसका पेट भरा होता है। आम आदमी तो, ‘रोटी-कपड़ा-मकान, ईलाज, रिश्तेदारी, भाईचारा’ में ही इस कदर उलझा रहता, कि उसे पता ही नही चलता बचपन-जवानी-बुढ़ापा और कब मौत हो गई, उसके मरने के बाद यह चर्चा होती है, बड़ा नेक व्यक्ति था, मिलनसार था, लोगों के लिए मददगार था, बहुत अच्छा लेखक, कवि, पत्रकार ...न जाने क्या-क्या गुण उसके अन्दर थे, स्वाभिमानी था, देशभक्ति की ऐसी भावना थी कि जन-गण-मन की राष्ट्रीय धुन कही पर सुनाई पड़े, वही खड़ा हो जाता था, आज वह हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी याद हमेशा हमें सताती रहेगी। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें, अपनी चरणों में प्रभु स्थान दें। इस दुःख की घड़ी में प्रभू उनके परिवार को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। आम आदमी इसी प्रकार आता है, और चला जाता है। कई तो, ऐसे चले जाते कि लोंगो को पता भी नहीं चलता, रामदीन इस दुनिया से कब चला गया।
   यह है आम आदमी। नरेन्द्र मोदी, राहुल गांधी, नीतिश, लालू, मुलायम जैसे व्यक्ति तो अब इस देश के खास व्यक्ति हैं, अब वे आम आदमी की समस्याओं से उफर उठ चुके हैं, उन्हे सपने देखने का पुरा अधिकार है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बन चुकी है, अरविन्द केजरीवाल भी उस पंक्ति में आकर खड़े हो गये हैं, जिन्हें सपना देखने का पुरा अधिकार  है। उनकी जो रोज-मर्रा की आवश्यकता है, वह तो वह आम आदमी द्वारा प्राप्त टैक्स की राशि से स्वतः ही पुरा हो जाएगा, जैसे अन्य खास व्यक्तियों का होता है। केजरीवाल को यह तय करना है कि पहले दिल्ली के आम लोगों  का, जो सपना है, उसे वे पुरा करते हैं या मुख्यमंत्री  के बाद प्रधानमंत्री  का सपना पाल लेते हैं।
   देश को बेहतर प्रधानमंत्री मिले, यह प्रत्येक भारतीयों का सपना है, मोदी-राहुल-केजरीवाल......जिनमें यह दक्षता है, जो इस देश के आम आदमी को सपना देखने लायक बना सकतें हैं, उनका स्वागत है।
   चाहें वह, चाय बेचने वाला हो, शहजादा हो या कोई और क्यों न हो, देश के करीब साढ़े बहत्तर करोड़ मतदाताओं को तो सिर्फ ऐसा व्यक्ति चाहिए, जो आम व्यक्ति को सपना देखनें लायक बना सके, वही इस देश का प्रधानमंत्री बनें।
  भाजपा के पी.एम. इन वेटिंग नरेन्द्र मोदी को देश को यह बताना चाहिए कि आप जिस गुजरात प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री  चुने गये हैं, वहां आम आदमी के लिए केन्द्र सरकार ने जो ‘मनरेगा’ कार्यक्रम चला रखा है, वह धरातल  पर क्यों नही उतर रहा! क्या सच में आम आदमी के लिए दिया गया ‘मनरेगा’ का फंड, दुसरे कार्यो में स्थानांतरित किया गया है! क्या संसदीय समिति के निर्देश पर केन्द्र सरकार ने, कई दफा आपको पत्र लिखा। आम आदमी के लिए दिए गये पैसे का, दुरूपयोग हुआ और हो रहा है, गुजरात के मुख्यमंत्री  ने उस अधिकारी  के खिलाफ क्या कार्रवाई की, जो आम आदमी के पेट पर प्रहार करने की साजिश रची है। साथ ही आपको यह बताना चाहिए कि अगर देश के मतदाताओं ने आपको प्रधानमंत्री के लिए समर्थन दिया तो, आप रास्ट्रहीत में क्या-क्या करेंगे, जिससे इस देश का आम आदमी, सपना देखने की स्थिति में पहुंच जायेगा।
   कांग्रेस अगर राहुल गांधी  को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाती है तो राहुल गांधी  भी देश के आम आदमी को यह बताये कि पांच वर्षो के लिए उनकी राष्ट्र विकास दृष्टि क्या है, आम आदमी क्या सपना देखने लायक बन सकेगा, उसकी आत्मा यह स्वीकार करेगी कि, ‘भारत की तस्वीर और आम लोगों की तकदीर बदलने का जज्बा आपके अंदर है।’
इसी प्रकार जिन-जिन खास व्यक्तियों ने प्रधानमंत्री बननें का सपना देखा है, वे इस राष्ट्र के आम आदमी को बताये कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में उनका विजेन (दृष्टि) क्या है। जाति-धर्म, अगड़ा-पिछड़ा, भाई-भतीजावाद इस लोकसभा चुनाव में नही चलेगा। भारतीय मीडिया (इलेक्ट्रोनिक, प्रिंट व सोशल मीडिया)  काफी सशक्त हो चुका है, ये बातें प्रधानमंत्री पद का मुंगेरी लाल के हसीन सपने पाले, खास आदमी को समय रहते समझ में आ जानी चाहिए।

नफरत की दिवाल गिराकर, बढ़ों राष्ट्र निर्माण की ओर,
आने वाली पीढ़ी, यह न बोले, नेताओं की सोच ही, गंदी थी।
सपने देखने की आजादी हो, अराजकता फैलाने की नहीं
अपने-अपने हिस्से का, हिन्दुस्तान बेचने का नहीं
अपने-अपने हिस्से का, हिन्दुस्तान बचाने की जदों-जहद हो!

.............................................................................ललित 'सुमन'

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