उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधनसभा चुनाव में अपने-अपने समीकरण बिठाने और सीट बरकरार रखने की जुगत में राजनेताओं की ‘आस्थाएं ‘ तेजी से बदल रही हैं और हाल के दिनों में नेताओं के दल बदल में खासी तेजी आने से स्थिति दिलचस्प होती जा रही है। आस्थाएं बदलने का यह सिलसिला इस साल मई में समाजवादी पार्टी के बहुजन समाज पार्टी विधयक पफरीद महपफूज किदवाई को अपने पाले में लाने से शुरू हुआ था। उसके बाद तो जैसे दोनों दलों के बीच एक-दूसरे के ‘माननीयों ‘ को अपने पास खींचने की होड़ सी लग गई। इस कवायद में अब तक सपा के सात विधयक बसपा में जबकि सत्तारुढ़ दल के चार विधयक सपा के पाले में जा चुके हैं। इसके अलावा भाजपा तथा कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं का अपनी पार्टी में विश्वास भी डोल रहा है। यह दिलचस्प है कि सभी पार्टियां दल-बदलुओं का खुले दिल से स्वागत कर रही हैं और उनके इस कदम को सही ठहराने तथा विरोध्यिों की जीत की सम्भावनाओं पर चोट देने की कोशिश में उन्हें चुनाव का टिकट भी दे रही हैं।
गत मई में मसौली से बसपा विधयक पफरीद महपफूज किदवई सपा में शामिल हुए। बाद में पिछले महीने के अंत में बसपा के दो और विधयक शेर बहादुर सिंह ;जलालपुरद्ध और कृष्ण कुमार सिंह ;मल्लावांद्ध सपा में शामिल हो गए। पार्टी ने इन सभी विधयकों को चुनाव के टिकट भी दे दिये। इसके अलावा डिबाई से बसपा के दागी विधयक भगवान शर्मा उपर्फ गुड्डू पंडित ने हाथी ;बसपा का चुनाव निशानद्ध छोड़कर साइकिल ;सपा का चुनाव चिन्हद्ध की सवारी कर ली। भाजपा के दो विधयक यशवंत सिंह चैहान ;सिकंद्राराउद्ध और राजेन्द्र सिंह ;पफतेहाबादद्ध, पूर्व विधयक एवं पार्टी की राज्य इकाई के सचिव गोमती यादव ने भी सपा की राह पकड़ ली। इससे पफूली नहीं समा रही सपा का दावा है कि उसकी लोकप्रियता बढ़ी है क्योंकि जनता यह मानती है कि राज्य की मायावती सरकार के जुल्म के खिलापफ सिपर्फ इसी दल ने सार्थक लड़ाई लड़ी है।
दूसरी ओर, बसपा की अपने चार विधयकों के सपा में शामिल होने पर प्रतिक्रिया कुछ यूं रही ‘‘ये सभी चार विधयक बसपा की विचारधरा के विपरीत काम कर रहे थे। उन्हें पार्टी से पहले ही निलम्बित किया जा चुका है और चूंकि उनके खिलापफ कापफी शिकायतें आ रही थीं लिहाजा उनका टिकट भी काट दिया गया है। ‘‘ पार्टी नेताओं के दल छोड़कर जाने के सिलसिले को रोकने के लिये बसपा अध्यक्ष और प्रदेश की मुख्यमंत्राी मायावती ने आश्वासन दिया है कि वह चुनाव के बाद पार्टी के सभी मौजूदा विधयकों को समायोजित करेंगी। बसपा ने हालांकि अभी अपने उम्मीदवारों की पूरी सूची जारी नहीं की है लेकिन अपना टिकट काटे जाने की आशंकाओं के चलते उसके नेता दूसरे दलों का दामन थाम रहे हैं। दूसरे दलों के नेताओं का अपने आंगन में स्वागत करने में कांग्रेस भी पीछे नहीं है। पार्टी के महासचिव दिग्विजय सिंह ने हाल में प्रतापगढ़ में दावा किया था कि बड़ी संख्या में बसपा के नेता उनके सम्पर्क में हैं और वे जल्द ही कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। सिंह ने यह दावा बसपा नेता और पूर्व विधन परिषद सदस्य सिराज मेंहदी के कांग्रेस में शामिल होने के बाद किया।
अपने चार विधयकों के सपा में शामिल होने के बाद बसपा ने भी हरकत में आते हुए सपा के सात विधयकों- संध्या कठेरिया ;किशनीद्ध, अशोक चंदेल ;हमीरपुरद्ध, सर्वेश सिंह सीपू ;आजमगढ़द्ध, संदीप अग्रवाल ;मुरादाबादद्ध, सुरेन्द्र सिंह लोद ;उन्नावद्ध, सूरज सिंह शाक्य ;उन्नाव ग्रामीणद्ध और सुलतान बेग ;बरेलीद्ध को अपने पाले में खींच लिया। बसपा की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य भविष्य में कई और विधयकों के पार्टी में शामिल होने का दावा करते हुए कहते हैं ‘‘अभी तो शुरुआत है- आगे आगे देखिये होता है क्या।‘‘ अपनी पार्टी के विधयकों के बसपा में शामिल होने पर सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चैध्री का कहना है कि बसपा सपा से निकाले गए या पिफर टिकट से वंचित किये गए विधयकों को अपने साथ लेकर नाटकबाजी कर रही है। भाजपा भी अपनी ताकत दिखाने के लिये विपक्षी दलों के नेताओं को लुभाने की कोशिश कर रही है। हालांकि अब तक दूसरे दल के किसी भी विधयक ने भाजपा का झंडा नहीं थामा है लेकिन बसपा नेता और पूर्व सांसद प. सिंह चैध्री पिछले महीने भगवा दल में जरूर शामिल हो चुके हैं।
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