Wednesday, 3 August 2011

आखिर क्यों ढेर हो रहे कागजी शेर






इंगलैंड का क्रिकेट दौरा जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, धोनी के धुरंधरों की कलई खुल रही है। टेस्ट क्रिकेट रैंकिंग में पहले स्थान पर काबिज तथा एक-दिवसीय क्रिकेट की विश्व-विजेता भारतीय टीम का प्रदर्शन अभी तक खेले गये दोनों टेस्ट मैचों में देश को शर्मसार करने वाला ही रहा है। हालांकि टेस्ट क्रिकेट में तो ड्रा भी सम्मान बचाने का एक प्रचलित विकल्प रहता है, लेकिन अगर हार-जीत को खेल के दो स्वाभाविक पहलू ही मान लें तो भी अपनी लाज बचाने के लिए आप कम से कम संघर्ष करते हुए तो हारेंगे? लेकिन भारतीय टीम है कि समर्पण करने के लिए उतावली नजर आती है। क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉड्र्स पर खेले गये पहले टेस्ट मैच में शर्मनाक हार के बाद बचकाना तर्क दिया गया कि तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। आप अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल रहे हैं। वन-डे के विश्व चैंपियन हैं, टेस्ट रैंकिं ग में भी दुनिया में नंबर वन हैं, तो फिर तैयारी कब और कैसे की जाये—यह आपको कौन बतायेगा? वैसे तो आर्थिक दृष्टि से दुनिया के सबसे संपन्न क्रिकेट बोर्ड —भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से भी यह उम्मीद की जाती है कि वह किसी क्रिकेट दौरे के लिए तैयारी जैसे अहम मसलों पर भी ध्यान दे, पर विश्व-कप जीतने पर बोर्ड द्वारा एक-एक करोड़ रुपये की पेशकश से खफा हो कर दो-दो करोड़ रुपये पर मानने वाले हमारे क्रिकेटर और उनके कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने इंगलैंड दौरे से पहले तैयारियों के लिए पर्याप्त समय देने के लिए बोर्ड पर दबाव क्यों नहीं बनाया?खेल के लिए अकसर कम तैयारी को रोना रोने वाले हमारे क्रिकेटर पैसे की खातिर आईपीएल से लेकर मॉडलिंग और टीवी तक पर कुछ भी करने को किस कदर तैयार रहते हैं, हम सभी जानते हैं। बेशक किसी भी दूसरे देश में वहां के वातावरण और विकेट के मिजाज से तालमेल बिठाने के लिए कुछ वक्त चाहिए ही। इंगलैंड भी इसका अपवाद नहीं है, पर यदि आप पेशेवर हैं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल रहे हैं तो इन स्वाभाविक कसौटियों पर तो आपको खरा उतरना ही होगा। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पेशेवरों के साथ ऐसी रियायत की बात सोची भी नहीं जानी चाहिए, पर यदि लापरवाही की हद तक उदारता दिखाते हुए ऐसा किया भी जाये तो हद से हद तक लॉड्र्स टेस्ट की पराजय को कम तैयारियों की आड़ में माफ किया जा सकता है, लेकिन टेंट ब्रिज में खेले गये दूसरे टेस्ट में मिली शर्मनाक हार पर धोनी और उनके धुरंधर क्या कहेंगे? हालांकि किसी भी विजेता टीम को खेल के हर क्षेत्र में श्रेष्ठ होना चाहिए, पर भारतीय टीम की असली ताकत उसकी बल्लेबाजी ही मानी जाती है, लेकिन विडंबना देखिए कि दोनों ही टेस्ट मैचों में देश को शर्मसार करने वाली हार में इस बल्लेबाजी ने ही निर्णायक भूमिका निभायी। पैसे के भूखे हमारे क्रिकेटरों ने खुद को जिस तरह आईपीएल की भट्टी में झोंका, उसका खमियाजा यह देश अब तक भुगत रहा है। वीरेंद्र सहवाग इंगलैंड दौरे के लिए तो स्वस्थ हो गये, पर टेस्ट शृंखला शुरू होने से पहले ही फिर दो टेस्ट मैचों के लिए अस्वस्थ हो गये। गौतम गंभीर लॉड्र्स में खेलते हुए ही चोटिल होकर टेंट ब्रिज मैच से बाहर हो गये। यही हाल जहीर खान का हुआ।जो खिलाड़ी टीम में हैं, वे भी पता नहीं क्यों अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पा रहे। इससे भी बड़ी हैरत की बात यह कि जो प्रदर्शन करते हैं, उन्हें खुद कप्तान धोनी निर्णायक क्षणों में मोर्चे से हटा देते हैं। जरा याद करिए लॉड्र्स में जब ईशांत शर्मा अंग्रेज बल्लेबाजों को ता-थैय्या करा रहे थे तो धोनी उन्हें हटाकर खुद गेंदबाजी करने आ गये। विकेट कीपिंग आपकी शुरू से ही दोयम दर्जे की है, जिस आतिशी बल्लेबाजी की बदौलत आपको टीम में लिया गया, वह पता नहीं कहां लापता हो गयी तो फिर आप गेंदबाजी में ही क्या कमाल दिखा देंगे? अंजाम जगजाहिर है, भारत के दबाव से निकलकर इंगलैंड इस कदर हावी हुआ कि मैच ही जीत लिया। टेंट ब्रिज में भारतीय गेंदबाजों ने पहली पारी में 68 रनों पर छह अंग्रेज बल्लेबाजों को पैवेलियन लौटा दिया था, पर जिस ओवर में श्रीसंत ने तीसरा विकेट लिया उसके अगले ही ओवर में धोनी ने उन्हें गेंदबाजी से हटा दिया। उसके बाद भी 128 रन के स्कोर पर इंगलैंड के आठ बल्लेबाज आउट कर दिये गये, लेकिन धोनी क ी लचर कप्तानी और हरभजन सिंह सरीखे अनुभवी स्पिनर की लगातार दूसरे टेस्ट में बेजान गेंदबाजी ने उन्हें 221 तक पहुंच जाने दिया। दूसरी पारी में तो और भी गजब हुआ, जब इंगलैंड ने 544 का विशाल स्कोर खड़ा कर, पहली पारी में बढ़त लेने वाले भारत को 478 रन का गगनचुंबी लक्ष्य दे दिया, लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने महज 158 रनों पर समर्पण कर दिया। जाहिर है, इस लगातार दूसरी बड़ी पराजय से भारतीय टीम की साख ही ध्वस्त नहीं हो गयी है, बल्कि टेस्ट रैंकिंग में उसकी बादशाहत भी खतरे में है। अगर ऐसा ही प्रदर्शन जारी रहा तो फिर भारतीय टीम की शिखर से फिसलन तय है।

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